गुणस्थान परिचय
"गुणस्थान" जैनदर्शन का एक विशिष्ट पारिभाषिक शब्द है। जैनदर्शन के अनुसार जीव के आवेग-संवेगों और मन वचन काय की प्रवृत्तियों के निमित्त से उसके अन्तरंग भावों में उतार-चढाव होता रहता है। जिन्हें गुणस्थानों द्वारा बताया जाता है। गुणस्थान जीव के भावों को मापने का पैमाना है। यह जीव के अन्तरंग परिणामों में होने वाले उतार-चढाव का बोध कराता है। साधक कितना चल चुका है और कितना आगे उसे और चलना है, गुणस्थान इस यात्रा को बताने वाला मार्ग सूचक पट्ट है। गुण स्थानों के माध्यम से ही जीव की मोह और निर्मोह की दशा का पता चलता है। इससे ही संसार और मोक्ष के अन्तर का पता चलता है। कुल मिलाकर आत्मा से परमात्मा तक की शिखर यात्रा में होने वाले आत्म विकास की सारी कहानी हमें गुणस्थानों द्वारा पता चलती है। समग्र जैन तत्वज्ञान और कर्मसिद्धांत का विवेचन इन्हीं गुणस्थानों द्वारा किया जाता है।
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